takleef kya hoti hai aur kyun hoti hai & takleef quotes
relationship-kya-hai,relationship me kya kya hota hai.
आप लोग की भाषा में बिन बुलाये मेहमान होती है तकलीफ ,जैसे कोई भी आता है और आपको चोट पहुंचता है,
या
बोलू की जिससे आप बहुत प्यार करते हो जैसे आपके परिवार के सदस्य ,दोस्त और आपके जीवन की वह व्यक्ति जिसका आपकी जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिनके बातो से आपको चोट भी पहुंचता है, और आपको बहुत तकलीफ होती है और उसका जिम्मेवार आप सामने वाले को समझते है की मुझे उनलोगो की वजह से तकलीफ हो रही है, उसने आपके साथ ऐसा किया है वैसा किया है, ऐसे बहुत सारी वजह होती जो हम बिना सोचे समझे सामने वाले को कसूरवार ठहरा देते है |
ऐसा नहीं होता है की हमारी तकलीफ में सामने वाला का दखल नामा ना हो, लेकिन उनको दखल करने का अनुमति भी तो हम ही देते है और उससे होने वाली तकलीफ की वजह भी उन्हीं को बताते है| हम बार- बार खुद को यह कह कर दुखी करते है की उनसे मुझे चोट पहुचांया ,उसने हमें तकलीफ दी है तो आज मैं रो रहा/ रही हूँ यानि आज जो भी मेरे साथ हो रहा है उसका पूरा श्रेय सामने वाला को जाता है ,या कह देते हैं मेरे नसीब में यही लिखा था |
दुनिया उन्हीं की खैरियत पूछती है जो पहले से ही खुश हो,
जो तकलीफ में होते है उनके तो नंबर तक खो जाता है |
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क्या सच में ऐसा होता है क्या ?
क्या हम अपनी तकलीफ की जिम्मेदार खुद नही होते | ठीक है थोड़ी देर के लिए भी मान लिया जाये आपलोगो की तरह की सारी तकलीफ जो मुझे हो रही है उसमे सामने वाले और मेरे नसीब के कारण हो रहा है,
जनाब तो एक बात बताइए
क्या नसीब ने बोला था आपको कि आप खुद से ज्यादा अहमियत किसी और को दो,
क्या नसीब ने बोला था की आप अपनी ख़ुशी की चाबी किसी और के हाथों में रख दो,
नहीं बोला था न ,
तो नसीब को कोसने वाले हमलोग होते कौन है?
समस्याओ की अपनी कोई
साइज नहीं होती,
वो तो सिर्फ हमारी हल करने की
क्षमता के आधार पर छोटी और बड़ी होती है|
कभी भी नहीं ||
जनाब, क्यूकी पास हम तभी हो सकते जाब पढाई करेंगे,कठोर परिश्रम करेंगे, तभी दावे के साथ भी कह पाएंगे की हम पास हो जाएंगे| तो यही भरोसा और सकारात्मक बातें आपको आपकी मंजिल तक ले जाती है. नसीब के भरोसे बैठा इंसान मुकेश अम्बानी नही बन जायेगा|
कुदरत ने तो..........
आनन्द ही आनन्द दिया था,
दुःख तो हमारी खोज हैं |
माना, मानवता के अनुसार हम नहीं चाहते हुए भी किसी से उम्मीद कर बैठते है, किसी को हक देते है,किसी को अपने जीवन में बहुत अहमियत दे देते है, फिर कुछ दिन बाद हमें लगता है यह गलत है ,सामने वाले की वजह से हमें बहुत तकलीफ़ हो रही है , यानि हम सामने वाले को अहमियत देते है तो भी हमे ही तकलीफ होती है , और नहीं देते तो भी हमे ही तकलीफ होता है ,
ऐसा क्यों होता है?
ऐसे बहुत सारे सवाल हमारे मन में उठते रहते हैं, जिनके उत्तर हमें नहीं मिल पाते, क्यूंकि जैसे ये सवाल हमारे मन में है ठीक उसी तरह से इसका उत्तर भी हमारे मन में ही होता है|
अपने हौसलों को ये मत बताओ की तुम्हारी तकलीफ कितनी बड़ी हैं,
अपनी तकलीफ को बताओ की तुम्हारा होसलों कितना बड़ा हैं||
हमारी तकलीफ ही वजह सिर्फ और सिर्फ हम खुद होते है, क्यूंकि पहले तो हम खुद से ज्यादा अहमियत सामने वाले को देते है ,अपने आप को ही भूल जाते है, तो इसमें हमारी आत्मविश्वास की कमी होती है, क्यूंकि हमें बखुबी पता होता है और हम बचपन से भी सुनते आये हैं कि हर वो चीज नुक्सान दे हो जाती है, जो सीमा से बाहर हो जाता है, ठीक उसी तरह से हम किसी को इतना ज्यादा अहमियत देते है कि अपने आप को अहमियत दे ही नहीं पाते, जब हम किसी को अहमियत देते तो, उनसे भी हम यही उम्मीद करते है कि वो भी हमे अहमियत दे हमारी कदर करे, लेकिन फिर हमारी कदर वहां पर नही हो पाती है, तो हम ये बोल देते उसे हमारी परवाह ही नही वो गलत इंसान है , क्या हम कभी भी सोचते है की ऐसा क्या हुआ जो सामने वाले को हमारी कदर ही नहीं|
ऐसा क्या हुआ ?
जो हमे उस लायक समझा ही नहीं गया , ऐसे कोई तो वजह होगी, कोई तो गलती हुई होगी हमसे जो ये सब हो रहा है हमारे साथ, काश हम खुद ये पूछ ले ,खुद में ढूंढ ले,तो हो सकता हमारी समस्या हल हो जाये और हमे कभी तकलीफ भी न हो|
दूसरों से की गई कोई भी उम्मीद,
हमारी तकलीफ और बुराई की जड़ हैं |
मौत से युही डरते है लोग,
क्यूंकि
तकलीफ तो ज़िन्दगी से होती है
YOUR LIFE YOUR RULES POEM. धन्यवाद |


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