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Importance of parents in our life,Essay on parents role in our life, Our parents essay.

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आज हम बात करते हैं हमारे जन्मदाता यानि हमारे माता- पिता की,उनकी अहमियत को जानते हैं,

माता – माँ वो होती हैं, जो अपनी संतान को  नौ महीने गर्भ में रख कर हर दुःख-कष्ट को सहते हुए जन्म देती है, निस्वार्थ भाव से|[ रब, हर एक माँ को सलामत रखना वरना
                               हमारे लिए दुआ कौन करेगा क्यूंकि
 माँ की दुआ वक़्त तो क्या नसीब भी बदलती हैं | ]
पिता  -  पिता,  जो आपके मार्गदर्शक होते है,आपकी हर जरुरत और सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखते है, ताकि आपको कोई तकलीफ नहीं हो|
  [जेब खाली हो फिर भी मना नहीं करते देखा, 
          मैंने पापा से अमीर इंसान कभी नहीं देखा ]

 पुरे ब्रह्माण्ड में एक ही ऐसा रिश्ता  है,' माता-पिता' का अपने बच्चों के प्रति जिसमे  छल, कपट,ईर्ष्या नहीं सिर्फ त्याग होता है,हमारे जीवन में माता-पिता की भूमिका सर्वश्रेष्ठ और महत्वपूर्ण होता है| क्यूंकि दुनिया में एक मात्र उनका ही प्यार सच्चा, पवित्र और वास्तविक है, जो हमेशा हमारे अच्छे और बुरे समय में साथ होते है, चाहे बच्चे  जितनी भी बुरी हरकतें करे, कभी भी माता-पिता के मन में उनके प्रति घृणा की भावना उत्पन नहीं होती है, अपने जीवन में वो अपने बच्चो को ही पहले प्राथमिकता देते है, बुरे समय में भी उम्मीद की झलक देती है और हमेशा साथ रहते है|[क्या खूब लिखा है किसी ने संगत का जरा ध्यान रखना,
साहेब,
संगत आपकी ख़राब होगी और बदनाम माँ-बाप और उनकी संस्कार होंगे]

माता-पिता, उस प्रकृति की तरह है जो हमेशा हमको देने के लिए जानी जाती है, बदले में कुछ नही लेती, जब हम पैदा होते है ,अपनी आँखे खोलते है तो हम कुछ नहीं जानते और कुछ करने के लायक नहीं होते है, हाँलाकि वो हमारे माता-पिता ही हैं जो हम छोटे से असमर्थ बच्चे को मानसिक, शाररिक,सामाजिक और बौद्धिक मनुष्य बनाती है. माता-पिता हमारे अच्छेदोस्त, अच्छे जीवन सलाहकार और प्रथम गुरु होते है, वो हमेशा हमारे स्वास्थ्य, शिक्षा, भविष्य और अजनबी से हमारी सुरक्षा के लिए तत्पर रहते है, कोई हमे चोट न पंहुचा दे,  इसके लिए चिंतित रहते है,हमेशा हमें सही दिशा की ओर आगे बढाते है. वो एक अच्छे श्रोता की तरह हमारी हर अच्छी और बुरी आदतों को सुनते समझते है, जो हम कहते है, वो हमें किसी हद में नहीं बाधन्ते, नहीं रोकते है सिर्फ अच्छे और बुरे में फर्क करना सिखाते है,अगर बच्चों की तबियत ख़राब हो जाये तो माता-पिता से ज्यादा चिंतित दुनिया में कोई और नहीं हो सकता,  दूसरी तरफ वो रात-दिन  कठिन परिश्रम करते है ,  ताकि उनके बच्चे का भविष्य  उज्जवल हो सके, वो हमारे हर सुख-दुःख का कारण जानते है,और कोशिश करते है की हम हमेशा खुश रहे इसलिए वो हमें धीरज,संयम, अनुशासन,गंभीरता,प्रेम आदि बहुत सारे गुण सिखाते है ,ताकि जीवन की हर परिस्थितियो के अनुसार ढलना सीख ले| उनके पास सदैव हमें देने  के लिए ज्ञान का अमूल्य भंडार होता है,वो कभी खत्म ही नहीं होता|  जिस तरह एक-एक बूँद से एक महासागर बनता है, ठीक उसी तरह माता-पिता अपनी एक-एक खून और पसीने की बूँद से सींच कर हम एक इंसान बनाते है, इसीलिए भगवान के द्वारा दिए गये आशीर्वाद होते  है, हमारे माता-पिता, जो सच्चा प्यार,लालन - पालन और बलिदान का अवतार होते है| हमारे जन्म से लेकर उनकी मृत्यु तक हर कदम पर वो हमारे साथ होते है|                                                            ममता और त्याग का कर्ज हम अपनी जान देकर भी नहीं चूका सकते लेकिन उन्हें खुश रखने की कोशिश तो कर सकते है|
[ कड़वा सच,
 माता पिता की नसीहत सबको बुरा लगता है,
माता-पिता की वसीहत सबको अच्छा लगता हैं]


आधुनिक समय में लोग माता-पिता की महत्त्व को भूलते ही जा रहे हैं, उनके साथ बैठना तो दूर उनसे दो मिनट  बात करने तक का वक़्त नहीं हैं लोगो के पास|
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कुछ ऐसे भी कुरुर संतान होते है जो माता-पिता के वृद्ध हो जाने पर  वृद्धाआश्रम छोड़ आते है|

आखिर क्यों? उनकी क्या गलती है?

अपने बच्चे को प्यार करना ,अच्छे से उनकी देखभाल करना, हर छोटी ख़ुशी का ध्यान रखना,हर तकलीफ से बचाना, उनकी हर मनोकामना को पूरी करना, अपनी जान तक न्योछावर करना,उनके त्याग का तो वर्णन भी करना नामुकिन है|
    [दम तोड़ देती हैं माँ-बाप की ममता, 
          जब बच्चे पूछते हैं,तुमने किया ही क्या हमारे लिए ,
                       (उस बेशर्म बच्चे को नहीं पता दुनिया से नौ महीने ज्यादा जानती हैं माँ उन्हें) ]

क्या यही है उनकी गलती ? जिनकी सजा उन्हें बुढ़ापे में मिलती है| 

लानत है, ऐसे बेशर्म बच्चो पे जो अपने माता-पिता को बोझ समझते हैं उनके अंतिम समय में उनका साथ छोड़ देते हैं, उन्हें  तकलीफ  में छोड़ देते हैं,  बेजान सी माँ-बाप की झोली जो खुशियों की गीत गाया करती थी, आज वो रोती रहते हैं तरसते रहते हैं अपने बच्चो को देखने के लिए ,अपने परिवार से मिलने के लिए, मेरा बच्चा आएगा सोच कर मरते दम तक इंतज़ार करते रहते हैं, उनके बच्चे के द्वारा इतना गलत किये जाने पर भी अपने बच्चो  को कभी बद्दुआ नहीं देते है|  कुछ तो शर्म कर लिया करो उनलोगो को घर से बेघर कर रहे हो, जो नौ महीना अपनी खून से सींची है ,अपना खून पसीना बहाकर तुम्हे एक काबिल इंसान बनाया है| माता-पिता का निरादर  भगवान के  सामन है| (वृद्धाआश्रम- उन लाचार  वृद्ध लोगो के लिए है जिनका बुढ़ापे का सहारा कोई नहीं है,कोई घटना या कारणवश उनका परिवार छीन गया हो )
[हर घर में बहू लक्ष्मी होती तो कभी तलाक नहीं होता,
हर पापा की बेटी परी होती तो कभी कन्या भ्रूण ह्त्या नहीं होते, 
ठीक उसी तरह लोग सास-ससुर को अपने माँ-बाप तरह मानते,तो कहीं वृद्धाआश्रम नहीं होता |]

             चाहे आप, जितनी भी मंदिरों में जाकर घंटा बजा लीजिये, नवरात्रों में कन्यापूजन कर लीजिये,मदर्स डे,फादर्स डे मन लीजिये,मंदिरों में दान देना या गरीबों को खाना खिलाना  सब व्यर्थ है. जो बच्चे अपने माँ-बाप की  वृद्धा-आश्रम छोड़ आते है,उनकी कदर नहीं करते, उनको इन सब का कोई फल नहीं मिलता| शायद इन सभी बातों का अभी आप पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन जब आप  वृद्धावस्था में आएंगे, फिर आपको इसकी अहमियत समझ में आएगी, आपके बच्चे भी वही करेंगे जो आपको अपने माता-बाप के साथ करते हुए देख रहे है|

क्या अपने कभी सोचा है?

आपकी गैर मौजदगी में, आपके बच्चे हमेशा टीवी के पास या वीडियो गेम में क्यों लगे रहते है, क्यों उनमें अच्छे बुरे की पहचान नहीं होती है| 

क्यूंकि, आपका घर , घर नहीं मकान होता है जिसमे ईंट,सीमेंट आदि  से बना है, घर वो होता जहाँ हमारे भगवान माता-पिता बसते है, आपके बच्चे के पास दादा-दादी होते तो वो टीवी और वीडियो गेम की जगह उनके साथ बैठे उनसे अच्छी बातें सीखते, उनके संपर्क में रहने से बच्चों को सही गलत पहचान करने की समझ हो जाती, जिससे वो अपनी लाइफ की सारी समस्या को हल कर लेते, जैसे वातावरण में आप रखेंगे वैसे ही बनेंगे, उनका भविष्य आपके हाथ में है|
[जिस घर में माँ-बाप हँसते हैं,
       उसी घर में भगवान बसते हैं|]

              जिस संतान को माता-पिता की सेवा का अवसर प्राप्त हो, तो समझ लीजिए वह बहुत भाग्यशाली है,माता-पिता की सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती है, उनकी सेवा से भागना पाप है, हमें स्वयं अपने माता-पिता की सम्मान और आज्ञा का पालन करना चाहिए, इससे हमारी आने वाली पीढ़ी के बच्चे भी वही सीखेंगे,और उनका अनुभव हमें हमेशा उन्नति की ओर ले जाता है, जो लोग अपनी माता-पिता  की सेवा नहीं करते है उनका अपमान करते हैं, उन्हें जीवन में कभी सुख शांति की प्राप्ति नहीं होता|
takleef kya hoti hain aur kyun hoti hai? (read it)
                 

इसे सिर्फ एक आर्टिकल के तौर पे ही न पढ़े,अपने जीवन में अम्ल करे,
अपने आप को जज करे आप क्या कर रहे |

                                                                                                         धन्यवाद |

Comments

Manish Patel said…
veey very fantastic yrr.. dil ko chhu liya..
Anonymous said…
Very very good yaar dil ko chu liya...��

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