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माता – माँ वो होती हैं, जो अपनी संतान को नौ महीने गर्भ में रख कर हर दुःख-कष्ट को सहते हुए जन्म देती है, निस्वार्थ भाव से|[ रब, हर एक माँ को सलामत रखना वरना
हमारे लिए दुआ कौन करेगा क्यूंकि
माँ की दुआ वक़्त तो क्या नसीब भी बदलती हैं | ]
पिता - पिता, जो आपके मार्गदर्शक होते है,आपकी हर जरुरत और सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखते है, ताकि आपको कोई तकलीफ नहीं हो|
[जेब खाली हो फिर भी मना नहीं करते देखा,
मैंने पापा से अमीर इंसान कभी नहीं देखा ]
साहेब,
संगत आपकी ख़राब होगी और बदनाम माँ-बाप और उनकी संस्कार होंगे]
[ कड़वा सच,
माता पिता की नसीहत सबको बुरा लगता है,
माता-पिता की वसीहत सबको अच्छा लगता हैं]
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कुछ ऐसे भी कुरुर संतान होते है जो माता-पिता के वृद्ध हो जाने पर वृद्धाआश्रम छोड़ आते है|
आखिर क्यों? उनकी क्या गलती है?
अपने बच्चे को प्यार करना ,अच्छे से उनकी देखभाल करना, हर छोटी ख़ुशी का ध्यान रखना,हर तकलीफ से बचाना, उनकी हर मनोकामना को पूरी करना, अपनी जान तक न्योछावर करना,उनके त्याग का तो वर्णन भी करना नामुकिन है|
[दम तोड़ देती हैं माँ-बाप की ममता,
जब बच्चे पूछते हैं,तुमने किया ही क्या हमारे लिए ,
(उस बेशर्म बच्चे को नहीं पता दुनिया से नौ महीने ज्यादा जानती हैं माँ उन्हें) ]
लानत है, ऐसे बेशर्म बच्चो पे जो अपने माता-पिता को बोझ समझते हैं उनके अंतिम समय में उनका साथ छोड़ देते हैं, उन्हें तकलीफ में छोड़ देते हैं, बेजान सी माँ-बाप की झोली जो खुशियों की गीत गाया करती थी, आज वो रोती रहते हैं तरसते रहते हैं अपने बच्चो को देखने के लिए ,अपने परिवार से मिलने के लिए, मेरा बच्चा आएगा सोच कर मरते दम तक इंतज़ार करते रहते हैं, उनके बच्चे के द्वारा इतना गलत किये जाने पर भी अपने बच्चो को कभी बद्दुआ नहीं देते है| कुछ तो शर्म कर लिया करो उनलोगो को घर से बेघर कर रहे हो, जो नौ महीना अपनी खून से सींची है ,अपना खून पसीना बहाकर तुम्हे एक काबिल इंसान बनाया है| माता-पिता का निरादर भगवान के सामन है| (वृद्धाआश्रम- उन लाचार वृद्ध लोगो के लिए है जिनका बुढ़ापे का सहारा कोई नहीं है,कोई घटना या कारणवश उनका परिवार छीन गया हो )
[हर घर में बहू लक्ष्मी होती तो कभी तलाक नहीं होता,
हर पापा की बेटी परी होती तो कभी कन्या भ्रूण ह्त्या नहीं होते,
ठीक उसी तरह लोग सास-ससुर को अपने माँ-बाप तरह मानते,तो कहीं वृद्धाआश्रम नहीं होता |]
क्या अपने कभी सोचा है?
आपकी गैर मौजदगी में, आपके बच्चे हमेशा टीवी के पास या वीडियो गेम में क्यों लगे रहते है, क्यों उनमें अच्छे बुरे की पहचान नहीं होती है|
क्यूंकि, आपका घर , घर नहीं मकान होता है जिसमे ईंट,सीमेंट आदि से बना है, घर वो होता जहाँ हमारे भगवान माता-पिता बसते है, आपके बच्चे के पास दादा-दादी होते तो वो टीवी और वीडियो गेम की जगह उनके साथ बैठे उनसे अच्छी बातें सीखते, उनके संपर्क में रहने से बच्चों को सही गलत पहचान करने की समझ हो जाती, जिससे वो अपनी लाइफ की सारी समस्या को हल कर लेते, जैसे वातावरण में आप रखेंगे वैसे ही बनेंगे, उनका भविष्य आपके हाथ में है|
[जिस घर में माँ-बाप हँसते हैं,
उसी घर में भगवान बसते हैं|]
जिस संतान को माता-पिता की सेवा का अवसर प्राप्त हो, तो समझ लीजिए वह बहुत भाग्यशाली है,माता-पिता की सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती है, उनकी सेवा से भागना पाप है, हमें स्वयं अपने माता-पिता की सम्मान और आज्ञा का पालन करना चाहिए, इससे हमारी आने वाली पीढ़ी के बच्चे भी वही सीखेंगे,और उनका अनुभव हमें हमेशा उन्नति की ओर ले जाता है, जो लोग अपनी माता-पिता की सेवा नहीं करते है उनका अपमान करते हैं, उन्हें जीवन में कभी सुख शांति की प्राप्ति नहीं होता|
takleef kya hoti hain aur kyun hoti hai? (read it)
इसे सिर्फ एक आर्टिकल के तौर पे ही न पढ़े,अपने जीवन में अम्ल करे,
अपने आप को जज करे आप क्या कर रहे |
धन्यवाद |


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